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क्या मदन लाल सैनी राजस्थान में बीजेपी की उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे?

राजस्थान में इस साल के आखिरी में चुनाव होने वाले हैं ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा चुनाव से पहले राज्य की जनता क्या राय बनाती है

Updated On: Jul 06, 2018 08:41 AM IST

Vijai Trivedi Vijai Trivedi
वरिष्ठ पत्रकार

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क्या मदन लाल सैनी राजस्थान में बीजेपी की उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही सरकारी योजनाओं से फायदा पाने वाले लोगों से मिलने के लिए 7 जुलाई को जयपुर जा रहे हैं लेकिन इस समारोह के साथ ही बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष की ताकत का इम्तिहान भी शुरु हो जाएगा. पिछले सप्ताह ही केंद्र ने मदन लाल सैनी को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया है.

टोंक रोड पर अमरुदों के बाग में होने वाले इस समारोह स्थल पर सात गुम्बद बनाए गए हैं ,जिनमें सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को बैठाने की व्यवस्था की गई है. करीब तीन लाख लोगों के समारोह में आने की उम्मीद है, इसके लिए राज्य भर में करीब साढ़े पांच हजार बसों का इंतजाम किया गया है. सैनी के अध्यक्ष पद संभालने के बाद यह पहला कार्यक्रम है, जिसमें प्रधानमंत्री शामिल हो रहे हैं.

राजस्थान में इस साल के आखिर तक चुनाव होने हैं और राष्ट्रीय अध्यक्ष ने 200 सीटों वाली विधानसभा में 180 सीटों का लक्ष्य बीजेपी के लिए रखा है, पिछली बार दिसम्बर, 2013 में बीजेपी को 160 से ज़्यादा सीटें मिली थी और फिर 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में सभी 25 सीटों पर कब्जा किया था. इस गणित से लक्ष्य एकबारगी में मुश्किल नहीं दिखता,लेकिन इसी साल हुए लोकसभा की दो सीटों अजमेर और अलवर और मांडलगढ़ की एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनावों में बीजेपी को तीनों जगह हार का सामना करना पड़ा था, जबकि ये तीनों सीटें पहले बीजेपी के पास थीं.

अलवर सीट तो बीजेपी ने एक लाख 90 हजार वोटों से हारी जबकि 2014 में उसने 2 लाख 84 हजार वोटों से यह सीट जीती थी. एक लोकसभा सीट में 8 विधानसभा सीट होती हैं यानी बीजेपी की 17 सीटों पर हार हुई. इन नतीजों के बाद ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पसंदीदा अशोक परनामी को अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा था और करीब तीन महीने से यह कुर्सी खाली पड़ी थी.

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आमतौर पर सीकर से जयपुर रोजाना बस से सफर करने वाले नए अध्यक्ष सैनी से जब मैंने सवाल किया कि कहीं आपको मुश्किल में तो नहीं डाल दिया गया है, इतना झगड़ा विवाद पार्टी और फिर सरकार के खिलाफ नाराज़गी? सैनी कहते हैं कि हम 180 सीटों के लक्ष्य को हासिल करके रहेंगें.सैनी ही इससे पहले बीजेपी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी देख रहे थे तो उन्होंनें कहा कि अब तक हम 25 हजार के करीब बीजेपी कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रशिक्षण दे चुके हैं.

हमारा लक्ष्य राष्ट्र निर्माण, सिर्फ चुनाव नहीं

हर स्तर पर अलग तैयारी है, बूथ प्रभारी हैं, हर 5-6 बूथ पर शक्ति केन्द्र है, फिर मंडल अध्यक्ष, विधानसभा सीट प्रभारी, जिला अध्यक्ष, संभाग अधिकारी और फिर प्रांतीय अधिकारी यानी तैयारी पूरी हो चुकी है. हम विधानसभा में 180 और लोकसभा में सभी 25 सीटें जीतेंगें.

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फिर सवाल किया लेकिन सरकार को लेकर नाराजगी?, सरकार को लेकर भी जो थोड़ी बहुत नाराज़गी है वो हम खत्म कर देंगें, लेकिन वसुंधरा सरकार ने जो बहुत सी अच्छी योजनाएं चलाईं हैं,उसका फायदा हमे मिलेगा. और गुटबाज़ी ? नहीं कोई गुटबाज़ी नहीं चलेगी, हम ना तो व्यक्ति के लिए काम करते हैं और ना ही पार्टी के लिए, हमारा लक्ष्य तो राष्ट्र निर्माण है, सिर्फ चुनाव लक्ष्य नहीं.

फिलहाल पार्टी में सैनी को अध्यक्ष बनाए जाने से राजपूत, गुर्जर और जाट समाज ने अपनी नाखुशी ज़ाहिर की है. वैसे सैनी माली समाज की नुमाइंदगी करते हैं जिसका वोट अब तक कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मिलता रहा है.

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अनुशासन को लेकर कठोर माने जाने वाले मदन लाल सैनी को ज़िम्मेदारी सौंपने से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने समझाइश दी कि सबके साथ मिल कर काम करना होगा. सैनी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद पर अध्यक्ष बनाए गए हैं और उनका नाम सुझाया बीजेपी के दिग्गज नेता ओम माथुर ने. माना जाता है क ओम माथुर और वसुंधरा राजे के बीच सत्ता को लेकर हमेशा से ही खींचतान चलती रहती है.

केन्द्रीय आलाकमान ने पहले जोधपुर से सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत का नाम सुझाया था, जिस पर मुख्यमंत्री राजी नहीं हुई,लेकिन पार्टी मुख्यमंत्री की पसंद के नेता को ज़िम्मेदारी देने के लिए तैयार नहीं थी और इस के बीच मदन लाल सैनी का नाम निकल कर आया ,जिस पर मुख्यमंत्री को तैयार होना पड़ा. सैनी को हाल ही में राज्यसभा का सांसद बनाया गया था.

ओम माथुर इससे पहले राजस्थान, गुजरात ,महाराष्ट्र और फिर यूपी के चुनावों में बीजेपी को जीत दिलाने का काम कर चुके हैं. माथुर कहते हैं कि ये सब तो मीडिया की कहानी है ,हम सब लोग मिल कर काम करते हैं. क्या आपने सैनी जी को अध्यक्ष नहीं बनवाया? एक ठहाका- इसका फ़ैसला पार्टी अध्यक्ष करते हैं जी, हम सब तो मिल कर काम करने वाले लोग हैं.

मदनलाल सैनी को बड़ी जिम्मेदारी

बताया जाता है कि दिल्ली से जब राष्ट्रीय अध्यक्ष के दफ्तर से मदन लाल सैनी के पास फोन आया, उससे पहले संघ के बड़े पदाधिकारी और ओम प्रकाश माथुर ने उन्हें सूचना दी कि आपको यह ज़िम्मेदारी दी जा सकती है. सैनी सूचना मिलने पर जयपुर में किसी को जानकारी दिए बिना दिल्ली पहुंच गए थे.

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उस रात दस बजे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मुलाकात करके सैनी को समझाइश तो दे दी ,लेकिन नाम का ऐलान तब भी नहीं हुआ और उन्हें अगले दिन सवेरे तक रुकने का आदेश मिला,फिर घोषणा शाम को हुई. सैनी और ओम प्रकाश माथुर की लंबे वक्त से दोस्ती बताई जाती है.

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ज़माने पहले बीजेपी के पुराने दफ्तर 11,अशोक रोड पर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मदन लाल सैनी, ओम प्रकाश माथुर, और मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दफ्तर एक लाईन में साथ- साथ होते थे. मोदी उस वक्त पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री, सैनी, भारतीय मजदूर संघ में महामंत्री, माथुर किसान मोर्चा के महामंत्री और कोविंद एससीएसटी मोर्चा के अध्यक्ष होते थे. और मोदी के साथ कभी कभी चाय पर चर्चा होती थी.

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